कुछ इश्क़ किया कुछ काम किया
वो लोग बहुत खुश किस्मत थे
जो इश्क़ को काम समझते थे
या काम से आशिकी करते थे
हम जीते-जी मसरूफ़ रहे
कुछ इश्क़ किया कुछ काम किया
काम इश्क़ के आड़े आता रहा
और इश्क़ से काम उलझता रहा
फिर आखिर तंग आकर हमने
दोनों को अधुरा छोड़ दिया
-फैज़
1976
